सागर के शाहपुर के हरदौल मंदिर परिसर में धर्मिक आयोजन में हुआ हादसा। सावन मास के प्रारंभ होते ही मंदिर में श्रद्धालु पार्थिव शिवलिंग बनाये जा रहे है। कार्यक्रम में बच्चे भी पार्थिव शिवलिंग बनाने पहुंचे हुए थे। अचानक मंदिर के बाजू में स्थित एक पूर्व खंडहर एवं जर्जर भवन की दीवार गिरने के कारण मलबे की चपेट में बच्चे आ गए। कुछ बच्चे घायल हैं, जिन्हें शाहपुर के स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। सागर के विधायक व पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव मौके पर पहुंचे। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। घायलों के इलाज के लिए अस्पताल में नहीं मिले डॉक्टर। विधायक गोपाल भार्गव भी मौके पर पहुंचे।

मध्य प्रदेश के सागर जिले के शाहपुर में रविवार को सुबह हृदय विदारक घटना ने पूरे क्षेत्र में गम में डुबा दिया। हरदौल मंदिर में पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं साथ ही भागवत कथा का आयोजन भी चल रहा है। सावन के महीने में यहां प्रातः काल से ही शिवलिंग बनाए जा रहे हैं। रविवार को भी शिवलिंग बनाने का काम शुरू हुआ। रविवार को अवकाश का दिन होने की वजह से शिवलिंग बनाने के लिए आठ से 14 साल के बच्चे भी बड़ी संख्या में पहुंचे। वे सुबह जब शिवलिंग बना रहे थे, तभी मंदिर परिसर के बगल में स्थित करीब पचास साल पुरानी एक जर्जर भवन की कच्ची दीवार भराभराकर गिर गई।
दीवार का मलबा शिवलिंग बना रहे बच्चों के ऊपर सीधी गिरा, जिससे आठ बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। तत्काल ही दीवार के मलबे को हटाने का कार्य शुरू हुआ तो इसके नीचे और दबे बच्चों को निकाला गया। नगर परिषद, पुलिस व नगर वासी राहत कार्य में लगे हुए हैं। सूचना मिलने पर रहली विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव भी मौके पर पहुंचे।
जानकारी के मुताबिक मंदिर परिसर के बाजू में पचास साल पुरानी यह दीवार जर्जर हो चुकी थी। इसके बाद भी इसे गिराया नहीं गया। सागर में इन दिनों भारी वर्षा हो रही है। 24 घंटे के अंदर ही यहां 104 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। ऐसे में कच्चे व जर्जर मकानों को खतरा बना हुआ है। मंदिर के पास स्थित भी मिट्टी की दीवार लगातार वर्षा में गिर गई, जिससे यह हादसा हो गया।

हादसे के बाद लोग घायलों को लेकर शाहपुर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं मिला। केवल एक कर्मचारी यहां मौजूद था। इसको लेकर क्षेत्रवालों ने इस पर नाराजगी जाहिर की। लोगों ने कहा कि यहां जो डॉक्टर हैं, वे कभी-कभार भी आते हैं जो दस्तखत करके चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में जब बच्चों को लाया गया तो मरहम-पट्टी करने वाला भी मौजूद नहीं था।











