एडवोकेट वशिष्ठ नारायण श्रीवास्तव ने बताया कि आवेदक योगेश जैन निवासी खजुराहो ने पूर्व में रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमटेड से बीमा कराया था और बीमा पॉलिसी प्राप्त की थी रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस कंपनी जबलपुर के सेल्स मैनेजर द्वारा आवेदक को यह अवगत कराया गया कि यदि वह उक्त पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं करना चाहते हैं, तब वह 22000/- रुपये जमा कर दे तथा पूर्व की पॉलिसी की प्रीमियम राशि 17,000/-रुपये को मिला 40,000/- रुपये की एफ०डी०आर ० बना देगा और दुबारा प्रीमियम राशि जमा नहीं करना पड़ेगा।बीमा कंपनी के सेल्स मैनेजर के बताये अनुसार परिवादी ने 23,000/-रुपये का चेक 422018 एस.बी.आई. खजुराहो से दिनांक-21.11.2014 को बीमा कंपनी के मुख्य कार्यालय मुबई को प्रेषित कर दिया।
कुछ समय पश्चात् अनावेदक कं.01 के द्वारा परिवादी को पुनः फोन कर बतलाया गया कि 99,000/- रुपये जमा करने पर 2,62,816/-रुपये, 1,91,000/- रुपये जमा करने पर 5.02.831/- रुपये, 2.91.100/- रुपये जमा करने पर 6,48,518/- रुपये प्राप्त होगा, तब परिवादी ने तीनों स्लेब में से 1,91,000/- रुपये वाली स्लेब के लिये चेक कं. 422027 राशि 84,000/- रुपये, चेक कं. 422028 राशि 97,000/-रुपये कुल 1,91,000/- रुपये बीमा कंपनी जबलपुर के कार्यालय को दिनांक-27.12. 2014 को प्रेषित कर दिया, किन्तु उसके पश्चात् बीमा कंपनी जबलपुर के सेल्स मैनेजर ने अपना फोन बंद कर दिया और दिनांक 12.09.20105 को परिवादी को पॉलिसी कं 51914030, 51975274 एवं 51974765 प्राप्त हुयी। दिनांक-12.09.2015 को परिवादी को उपरोक्त तीनों पॉलिसी प्राप्त हुयी तब परिवादी ने उक्त पॉलिसी को पढ़ा और उनमे लिखी शर्ते एवं परिपक्वता राशि के संबंध में जानकारी ली जो कि अनावेदक कं.01 के द्वारा बतायी गयी शर्तों से बिल्कुल विपरीत थी और तीनों पॉलिसियों में मिलने वाली राशि अनावेदक कं.01 के द्वारा बताये गये किसी भी स्लैब से नही मिलती थी। उपरोक्त पॉलिसियां पूर्ण रूप से फर्जी थी, उन पॉलिसियों के दस्तावेजों में परिवादी के हस्ताक्षर से मिलते-जुलते हस्ताक्षर बनाकर पॉलिसी तैयार की गयी थी। पॉलिसी कं. 51974765 में केवल 76,811/- रुपये राशि ही विवरण लेख है, जबकि अनावेदक कं.01 ने परिवादी से उक्त पॉलिसी के संबंध में 99,000/- रुपये की चेक प्राप्त किया था। अर्थात् 20,189/- रुपये प्रीमियम राशि को बीमा कंपनी के सेल्स मैनेजर के द्वारा पॉलिसी में लेख नहीं किया गया था। कपट की जानकारी होने पर परिवादी ने दिनांक-12.09.2015 को ही बीमा कंपनी के स्थानीय शाखा छतरपुर में लिखित आवेदन पत्र प्रस्तुत किया, किन्तु बीमा कंपनी के द्वारा कोई कार्यवाही नही की गयी। परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से बीमा कंपनी को नोटिस भी प्रेषित किया, किन्तु अनावेदकगण के द्वारा नोटिस का जबाव प्रस्तुत नही किया। इस आधार पर बीमा कंपनी के द्वारा कपटपूर्ण ढंग से अनुचित व्यापारिक प्रथा कारित करते हुये परिवादी के साथ छल कारित कराते हुये बीमा पॉलिसी विक्रय की इसके पश्चात मामला उपभोक्ता आयोग छतरपुर के न्यायालय में आया और मामले का अवलोकन कर आयोग के अध्यक्ष सनत कुमार कश्यप सदस्य निशा गुप्ता एवम सदस्य धीरज गर्ग ने पाया कि आवेदक योगेश जैन के पक्ष मे जारी 3 बीमा पॉलिसीयों को निरस्त कर आवेदक से प्राप्त कुल राशि 2,14,000रु आदेश दिनांक के 30दिवस के अंदर अदा करे एवम उपरोक्त राशि बीमा कंपनी को प्राप्त होने की तिथि से अदायगी दिनांक तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज की राशि भी परिवादी को अदा करे साथ ही सेवा में कमी के लिए 50000 रु व वाद व्यय के रूप में 5000रु अदा करने का आदेश प्रदान किया












