संघ के शताब्दी वर्ष में संघ पर प्रतिबंध की अजीबोगरीब मांग
कृष्णमोहन झा/
पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरुद्ध जो अभियान चला रखा है उससे संघ को भले ही कोई नुक़सान न हुआ हो लेकिन कांग्रेस आज भी अपने इस एक सूत्रीय कार्यक्रम को विराम देने की आवश्यकता महसूस नहीं कर रही है। दूसरी ओर समाज में संघ के प्रति आकर्षण भी बढ़ा है और अब उसकी देश भर में उसकी स्वीकार्यता भी तेजी से बढ़ रही है लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि खुद कांग्रेस यह स्वीकार करने के लिए कतई तैयार नहीं है कि उसे संघ के विरुद्ध विषवमन का यह अभियान छोड़ कर अपने जनाधार को बढ़ाने के कोई दूसरे तरीके खोजने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। शायद इसीलिए उसके दिग्गज नेता भी आए दिन संघ के विरुद्ध कोई न कोई बयान देने से परहेज़ नहीं करते। इसी क्रम में हाल में ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तो बाकायदा संघ को प्रतिबंधित करने की मांग कर डाली और चौतरफा आलोचनाओं में घिर गए। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि मैं खुले तौर पर कहता हूं कि आर एस एस पर प्रतिबंध लगना चाहिए।साथ ही उन्होंने इसे अपना निजी विचार भी बता दिया। गौरतलब है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में मंत्री और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे भी पिछले कुछ दिनों से संघ विरोधी बयान देकर सुर्खियां बटोरने में जुटे हुए हैं। मजे की बात तो यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में अग्रणी और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदम्बरम के बेटे कार्ति चिदम्बरम ने खड़गे के बयान से असहमति जताते हुए यह कहा है कि संघ पर प्रतिबंध संभव नहीं है।
उधर जबलपुर में संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की त्रिदिवसीय बैठक के समापन के पश्चात् संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने मल्लिकार्जुन खड़गे पर पलटवार करते हुए कहा कि खड़गे को पहले के अनुभव से सीख लेनी चाहिए। इससे पहले भी तीन बार संघ को प्रतिबंधित करने का प्रयास हुआ है।अब चाहे वे चाहें तो फिर से प्रयास कर लें लेकिन पहले ये भी बताएं कि इसकी जरूरत क्या है। होसबोले ने पूछा कि अतीत में जब संघ पर प्रतिबंध लगाया गया तो समाज और न्याय पालिका ने क्या कहा। सरकार्यवाह ने दो टूक लहजे में कहा कि आर एस एस भारत की सुरक्षा, संस्कृति और विकास के लिए कार्य करने वाला संगठन है। किसी भी संगठन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कारण होना चाहिए ।आर एस एस लगातार समाज और राष्ट्र निर्माण में जुटा हुआ है और जनता ने उसे स्वीकार किया है। संघ सभी पार्टियों का है । संघ के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। सरकार किसी भी पार्टी की हो हम अपने विचार सबके सामने रखते हैं। आज सरकार में संघ के स्वयं सेवक बैठे हैं इसलिए संघ और भाजपा के बीच अच्छा समन्वय है।यह भी सच है कि संघ में भाजपा के कार्यकर्ता ज्यादा हैं।
संघ की त्रिदिवसीय बैठक में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर हुए सार्थक विचार विमर्श और उसके पश्चात् पारित प्रस्ताव की जानकारी देने हेतु आयोजित पत्रकार वार्ता में संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि युवाओं में नशाखोरी की बढ़ती प्रवृत्ति पर संघ चिंतित है । भारत के युवाओं में राष्ट्रभक्ति, दुनिया से टक्कर लेने का जज्बा और आत्मविश्वास भरपूर है लेकिन नशाखोरी एक समस्या है। इससे युवाओं में बीमारी आ रही है। कालेजों और स्कूलों में ड्रग्स बेची जा रही है। इस पर नियंत्रण के लिए कार्य करना होगा।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित प्रश्न के उत्तर में दत्तात्रेय होसबोले ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उसे प्रामाणिक बनाना है इसलिए उसका विरोध करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को परिष्कृत करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। सूची परिष्कृत करने की प्रक्रिया को लेकर यदि कोई आपत्ति है तो उसकी शिकायत चुनाव आयोग से अवश्य की जानी चाहिए।
सरकार्यवाह ने स्पष्ट कहा कि जातिगत जनगणना का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए इससे समाज टूटता है। जो जातियां पिछड़ी हुई हैं उनके उत्थान के लिए आंकड़े आवश्यक हैं। जातिगत जनगणना का उद्देश्य यही है।
छत्तीसगढ़ और झारखंड में नक्सली गतिविधियों में आई कमी को सकारात्मक परिवर्तन बताते हुए सरकार्यवाह ने कहा कि नक्सली अब हथियार छोड़ कर समाज की मुख्य धारा में लौटने के लिए तैयार हो रहे हैं। यह अच्छा संकेत है।मणिपुर में भी हालात अब सुधर रहे हैं और वहां शीघ्र ही अच्छे दिन आने की उम्मीद है। होसबोले ने मणिपुर में पिछले दो वर्षों में संकटपूर्ण परिस्थितियों में संकटपूर्ण परिस्थितियों धरातल पर किए जा रहे कार्यों को सराहनीय बताते हुए कहा कि उससे परस्पर विश्वास का वातावरण निर्मित करने में मदद मिली है। उन्होंने पश्चिम पश्चिम बंगाल में अस्थिरता फैलाने वालों को राजनीतिक प्रश्रय मिलने पर चिंता व्यक्त की और इसे देश के साथ अन्याय निरूपित किया। सरकार्यवाह ने वहां संघ के स्वयंसेवकों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी पत्रकारों को दी । सरकार्यवाह ने मतांतरण और घुसपैठ के फलस्वरूप निर्मित हो रही जनसंख्या अंसतुलन की स्थिति को चिंता जनक बताते हुए सरकार से शीघ्र ही जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की । सरकार्यवाह ने पंजाब में मतांतरण की समस्या को गंभीर बताया और कहा कि संघ देश भर में धर्म जागरण के अभियान में जुटा हुआ है। इसमें धर्मगुरुओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। लिव इन रिलेशनशिप के दुष्प्रभावों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाने से इसे नियंत्रित करना संभव नहीं है। यह काम अच्छे संस्कार देकर ही किया जा सकता है।
संघ पर प्रतिबंध लगाने की मल्लिकार्जुन खड़गे की मांग की तीखी आलोचना करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि आर एस एस एक ऐसा स्वयंसेवी संगठन है जिसने हम जैसे करोड़ों युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है। देश भक्ति और अनुशासन के संस्कार दिए हैं। और हमें यह भी देखना चाहिए कि संघ से निकले हुए दो लोग देश के प्रधानमंत्री बने हैं। मेरा मानना है कि उनकी गणना देश के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों के रूप में की जाएगी। अमित शाह ने देश के विकास और समाज को सही दिशा दिखाने में आर एस एस के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आर एस एस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है जिसकी स्थापना के सौ साल पूरे हो गए हैं आर एस एस में हजारों लोग ऐसे हैं जिनका अपना न घर है , न बैंक बैलेंस है ,न परिवार है। वे मातृभूमि की सेवा के लिए आगे आए हैं।शाह ने कहा कि मैं खड़गे जी की मंशा समझ रहा हूं लेकिन उनकी यह मांग कभी पूरी नहीं हो पाएगी।उनको मालूम नहीं है कि अभी चुनाव चल रहे हैं और जनता उनकी इस मांग का जवाब इन्हीं चुनावों में दे देगी ।
(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)













