‘शिक्षा में आध्यात्मिकता’ विषय पर हुआ दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आगाज़
हिंदी ग्रन्थ अकादमी एवं एमसीबीयू के बीच हुआ एमओयू : नए परिसर में अतिथियों ने किया वृक्षारोपण

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी,छतरपुर में मप्र उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित “शिक्षा में आध्यात्मिकता” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का गरिमापूर्ण आगाज 28 जुलाई रविवार को जेसी बोस सभागार में डा हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी सागर की कुलगुरू प्रो नीलिमा गुप्ता के मुख्य आतिथ्य में हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता एमसीबीयू,छतरपुर की कुलगुरू प्रो शुभा तिवारी ने की।विशिष्ट अतिथि के रूप में डा अशोक कड़ेल ,संचालक, हिंदी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल एवं उज्जैन यूनिवर्सिटी के प्रो धर्मेंद्र मेहता उपस्थित रहे। रजिस्ट्रार श्री यशवंत सिंह पटेल, कला संकाय की डीन डॉ पुष्पा दुबे तथा कार्यशाला के संयोजक डॉ एसके छारी भी मंचासीन रहे।कार्यशाला का समापन आज दूसरे दिन 29 जुलाई 2024 को विभिन सत्रों के व्याख्यान के साथ होगा।
मीडिया प्रभारी डा सुमति प्रकाश जैन के मुताबिक कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के पूजन अर्चन के साथ हुआ।इस अवसर पर अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि प्रो नीलिमा गुप्ता कुलगुरु हरिसिंह गौर वि.वि.,सागर ने कहा कि स्वस्थ्य मस्तिष्क के निर्माण हेतु शिक्षा में आध्यात्मिकता की आवश्यकता है ।अध्यात्म हमे समाज से जुड़ना सिखाता है तो ध्यान हमे एकाग्रता की ओर ले जाता है।अध्यात्म एवं ध्यान एक दूसरे के पूरक हैं।छात्रों के चरित्र निर्माण में दोनों का बहुत महत्व है।इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रो शुभा तिवारी ने कहा कि हमारे विचारों और सोच का सकारात्मक एवं शुद्ध होना ही आध्यात्मिकता हैl उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति कभी बोर नहीं होता क्योंकि वह स्वयं के साथ रहना जनता हैl
आपके विचार आपके सबसे सच्चे साथी हैं।आपने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परपंरा को दिए जा रहे महत्व को रेखांकित करते हुए भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने में उपयोगी बताया। इस अवसर पर एमसीबीयू एवं हिंदी ग्रन्थ अकादमी के बीच एक एम ओ यू किया गया, जिसमें यूनिवर्सिटी के छात्र छात्राओं को बेहद रियायती दर पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हिंदी ग्रन्थ अकादमी,भोपाल के संचालक डॉ अशोक कड़ेल ने कहा कि शिक्षा में भारतीयता का समावेश नई शिक्षा नीति ने किया है I व्यक्ति की कुशलता और क्षमता को बाहर लाना ही आध्यात्मिकता है।जो नित नूतन चिर पुरातन है वही सनातन है l इस कार्यक्रम में विक्रमविश्वविद्यालय से पधारे प्रो धर्मेंद्र मेहता ने कहा कि आध्यात्मिकता के बिना मनुष्य का उत्थान सम्भव नहीं l मनुष्य के अंदर विद्यमान जड़ता, अहंकार, चंचल चित्तवृत्ति जैसे दुर्गुणों को दूर करने का रास्ता आध्यात्मिकता से होकर गुजरता है।
मध्यांतर में सभी अतिथि गौरैया स्थित यूनिवर्सिटी के नए विकसित हो रहे परिसर पहुंचे। सभी अतिथियों ने नए यूनिवर्सिटी परिसर में वृक्षारोपण किया तथा निर्माण कार्य का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में शिक्षा में आध्यात्मिकता विषय के साथ उप विषयों पर आमंत्रित वक्ताओं ने सारगर्भित व्याख्यान दिए। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो राकेश ढांड उज्जैन ने की।कार्यशाला में प्रो आरएन मालवीय,सोनीपत, हरियाणा,डा प्रेमलता चुटेल, उज्जैन,ब्रह्मकुमारी किरण दीदी भोपाल, डा राकेश ढांड, उज्जैन एवं डा संजय स्वामी नई दिल्ली ने भारतीय ज्ञान परंपरा तथा अध्यात्म पर गहनता से प्रकाश डालते हुए इसकी समग्र विवेचना की। कार्यशाला के इस द्वितीय सत्र का संचालन डा एसके छारी ने किया।डा सुमति प्रकाश जैन ने सभी का आभार माना।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के प्रारंभ में संगीत विभाग के श्री शैलेन्द्र वर्मा के निर्देशन में संगीत की छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं कुलगान की मनोहारी प्रस्तुति दी। यूनिवर्सिटी परिवार एवं आयोजन समिति की ओर से आमंत्रित अतिथियों का शाल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से हार्दिक स्वागत किया गया। स्वागत भाषण प्रो. जेपी शाक्य ने दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो बीएस परमार ने किया।अंत में कला संकाय अध्यक्ष प्रो पुष्पा दुबे ने सभी का आभार ज्ञापित किया।
इस कार्यशाला में हिंदी ग्रंथ अकादमी भोपाल के तत्वावधान में एक आकर्षक पुस्तक प्रदर्शनी एवं विक्रय केंद्र तथा यूनिवर्सिटी के चित्रकला विभाग द्वारा चित्रकला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।इस केंद्र का उद्घाटन कुलगुरू प्रो नीलिमा गुप्ता, सागर, कुलगुरू प्रो शुभा तिवारी,छतरपुर, हिंदी ग्रन्थ अकादमी, भोपाल के संचालक डॉ अशोक कड़ेल ने दीप प्रज्ज्वलित एवं फीता काट कर किया।इसके बाद सभी अतिथियों ने लुभावनी चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों द्वारा बनाई चित्ताकर्षक पेंटिंग्स की भूरि भूरि सराहना की।













